स्वागत पावस आज तुम्हारा,
तेरे पौरुष से, प्रचंड वह,
ग्रीष्म आज है हारा.
आज धरित्री भी प्रमुदित है,
सभी वनस्पतियाँ भी कुसुमित हैं,
दृश्य लग रहा प्यारा.
स्वागत पावस आज तुम्हारा.
ह्रदय कमल कृषकों के खिलते,
वन के सारे पत्ते हिलते,
यौवन का उन्माद लिए,
बहती नदियों की धारा,.
स्वागत पावस आज तुम्हारा.
जीवन है आशा का नाम,
उत्पीडन असुरों का काम,
यही तुम्हारा जीवन -दर्शन,
माँन रहा जग सारा ,
स्वागत पावस आज तुम्हारा.
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डॉ.बच्चन पाठक 'सलिल' |
manniya salil ji
जवाब देंहटाएंnamastey
aapki bahut sunder kavita hai, badhai ho
-hamare ek mitra prof. kuldip salil hain,
jo hans raj college, delhi university se haal mein retire hue hain,
regds,
-om sapra, delhi-9
9818180932