बुधवार, 8 अगस्त 2012

यादें {तेजेन्द्र शर्मा (लन्दन) की एक कविता}



तुम पूछते हो 
मुझे अपना वतन
याद आता है या नहीं

दिल्ली की चाट

मुंबई की भेल पूरी
मेरे सपनों में आते हैं या नहीं
दोसा, इ़डली, गोलगप्पे
मेरे स्वाद तंतुओं को
परेशान करते हैं या नहीं।

तुम पूछते हो
दोस्तों की याद आती है या नहीं।
तुम्हारी आंखों में पढ लेता हू
यह सवाल कि क्या
मां की प्रतीक्षारत आंखें मेरी
रातों की नींद में आंसू 
भर देती हैं या नहीं।

मुझे बार बार याद दिलाते हैं
तुम्हारे सवाल
कि मैनें इस मुल्क़ में आकर
बसने में
बहुतों से ग़द्दारी की है।

सच यह नहीं है मेरे दोस्त
जब साउथहॉल से गुज़रता हूं
साक्षात हो उठता है चांदनी चौक।
वही ख़ुश्बू, वही स्वाद, वही बोली।
सब कुछ वैसा ही है। 

ईलिंग रोड मुझे करता है आश्वस्त
कि मैं दूर नहीं हूं मुंबई से।
साड़ी की दुकानें, वी.बी. एण्ड सन्स
मसाले, दालें, सब अपने से लगते ब्राण्ड
वही अचार, वही साबुन और आयुर्वेदिक पेस्ट
कुछ भी नहीं बदला।
सब कुछ वैसा ही है। 
मेरा वतन मेरे साथ
यहां चला आया है। 

मगर सच है
कभी कभी ये होता है
हो जाता हूं अकेला
वर्षों बाद भी नहीं बोल पाता
यहां जैसी ग़लत अंग्रेज़ी
सही बोल कर भी टटोलता हूं
अपनी नाक
नकटा तो नहीं हो गया।

याद आती है उन आंखों की
जो टेलिफ़ोन आने पर
भर जाती हैं ख़ुशियों से
मोहल्ले भर को बताता हैं
कि फ़ोन बेटे का है।
याद आते हैं वो रिश्ते
जिनसे रिश्ता बिना मतलब का था।

रुकता हूं
होता हूं परेशान
सोचता हूं
धीरे धीरे वही करता हूं
जो करता हूं रोज़ाना
कपड़े पहनता हूं
जूते कसता हूं
और चल देता हूं
रेलवे स्टेशन की ओर.

                         - तेजेन्द्र शर्मा, लन्दन 







प्रतिष्ठित प्रवासी भारतीय साहित्यकार तेजेन्द्र शर्मा (लन्दन)

21 अक्टूबर 1952 को पंजाब के शहर जगरांव में जन्में तेजेन्द्र शर्मा की स्कूली पढाई
दिल्ली के अंधा मुगल क्षेत्र के सरकारी स्कूल में हुई. इन्होने 
दिल्ली विश्विद्यालय
से बी.ए. (ऑनर्स) अंग्रेज़ी, एम.ए. अंग्रेज़ी की उपाधि प्राप्त की.
इनके 
काला सागर, ढिबरी टाईट , देह की कीमत , ये क्या हो गया? आदि
अनेक कहानी संग्रह प्रकाशित हुए हैं. इसके अतिरिक्त पंजाबी में अनूदित कहानी संग्रह
ढिम्बरी टाईट,  नेपाली मे अनूदित कहानी संग्रह पासपोर्ट का रंगहरू तथा
उर्दू मे अनूदित कहानी संग्रह ईटो का जंगल प्रकाशित हो चुके हैं.
 भारत एवं इंगलैंड की लगभग सभी पत्र पत्रिकाओं में कहानियां, लेख, समीक्षाएं,
कविताएं एवं गज़लें प्रकाशित होने के साथ साथ इनकी कहानियों का पंजाबी,
मराठी, गुजराती, उडिया और अंग्रेज़ी में अनुवाद भी प्रकाशित हुए हैं.

तेजेन्द्र शर्मा ने दूरदर्शन के लिये शांति सीरियल का लेखन, 
अन्नु कपूर द्वारा निर्देशित फिल्म
अभय में नाना पाटेकर के साथ अभिनय भी किया. 
इन्हें ढिबरी टाइट के लिये महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार 1995, सहयोग फ़ाउंडेशन का युवा साहित्यकार पुरस्कार - 1998, सुपथगा सम्मान  1987, कृति यूके द्वारा अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान एवं पद्मानंद साहित्य सम्मान का प्रति वर्ष लंदन में आयोजन. लंदन से प्रकाशित होने वाली त्रैमासिक हिन्दी साहित्यिक पत्रिका पुरवाई का संपादन.

6 टिप्‍पणियां:

  1. bhai tajender ji
    namastey,
    bahut sunder aur prabhav shali kavita "yaden" ke liye badhai ho
    hamari shubhkamnayen,
    "purvai" ki prati bhejne ka kasht karen,
    uski samiksha hamare ek mitra ki magazine "mitra sangam patrika" monthly mein dene ka vichar hain,
    uske editor shri prem vohra, all india radio se retire hue hain,
    agrim dhanyavad
    -om sapra
    N-22,
    behind batra cinema,
    dr. mukherji nagar,
    delhi-9
    09818180932

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  2. मित्रो, हरीश भाई को कविता लगाने के लिये धन्यवाद। आपको कविता पसन्द आई, अच्छा लगा। एक बात साफ़ करना चाहूंगा कि मैनें पुरावाई पत्रिका का संपादन 2 वर्षों के लिये किया था। उसके बाद से उसका संपादन मैनें वापिस डा. पद्मेश गुप्त को सौंप दिया था, जो कि आजकल इसके संपादक हैं।

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  3. बेहद खूबसूरत भाव ......हर कोई अपना घर अपना वतन यादों में बसा कर रखता हैं ....

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  4. बहुत बहुत खूबसूरत तेजेंद्र जी.दिल खुश हो गया.

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  5. dil ki gahraio se likhi uttam bhaw liye behad khoobsurat rachna ,tejinder sharma ji sunder likhne ke liye badhai .

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