सोमवार, 13 अगस्त 2012

१५ अगस्त नहीं सिर्फ एक तारीख



१५ अगस्त नहीं सिर्फ 
एक तारीख जिसे 
रस्मी तौर पे याद किया व् मनाया जाये 
ये तो वो दिन है 
जो याद दिलाता है कैसे 

गुलामी की जंजीरों को
तोड़ने के लिए असंख्य शहीदों ने
मौत को हँसते - हँसते गले लगाया
ताकि हम आज़ादी की साँस ले सकें !!
और हम सिर्फ और सिर्फ
कभी धर्म ,कभी जात -पात
कभी आरक्षण ,कभी राजनितिक
व् अपने निजी फायदों ,मसलों की आड़ में
देश को बाँटने की फ़िराक में रहते हैं !!

भाषा चाहे कोई हो
धर्म चाहे कोई हो
इन्सान के दिल का तो
एक ही रंग -रूप है
ऐसे ही सच्ची इंसानियत
को एन सियासी बातों के दाव-पेचों
से तोड़ा या मरोड़ा नहीं जा सकता !!
तो आओ मिलकर बनाएं
दिल से दिल तक राह ऐसी
जिस में न हो नफरत , द्वेष ,एहं के कांटे ..........
बस हो प्यार की महक ,प्यार की गूँज सदा
भर दें सारी की सारी खाईयां नफरतों की
प्यार की फुहार से
प्रीत पाले छोड़ नफरतों के कफ़न
आओ बनायें एक ऐसा
जहाँ जिधर महके सिर्फ प्यार ,अमन ,खुशहाली
और हम गर्व से कहें की
हमारा सिर्फ
एक ही धर्म ,एक ही मज़हब
एक ही जात ,एक ही पात
एक ही वचन ,एक ही इबादत
है इंसानियत सिर्फ इंसानियत !!!!!







मीनाक्षी सुकुमारन 

दिल्ली विश्ववविद्यालय के मैत्रेयी कॉलेज से बी.कॉम. की उपाधि प्राप्त करने के साथ साथ हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. की उपाधियाँ प्राप्त. 

https://www.facebook.com/meenakshi.sukumaran

1 टिप्पणी:

  1. कविता सचमुच भावपूर्ण है.. देश के इस सत्य को सभी देशवासियों के लिए जानना बहुत जरूरी भी है.....

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